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मुंगेर में नक्सली आत्मसमर्पण, SP सैयद इमरान मसूद की रणनीति से जिले में शांति और सुरक्षा

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मुंगेर। बिहार के मुंगेर जिले में लंबे समय तक आतंक का पर्याय रहे कुख्यात नक्सली सुरेश कोड़ा उर्फ मुस्तकीम ने आखिरकार हथियार डालकर पुलिस और एसटीएफ के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।।सुरेशकोड़ा पिछले 25 वर्षों से सक्रिय रहा और SAC (स्पेशल एरिया कमेटी) का सदस्य था। उसके खिलाफ मुंगेर, लखीसराय और जमुई जिलों में दर्जनों नक्सली कांड दर्ज हैं जिनमें कई हमले, बंदूक और विस्फोटक हमले तथा दर्जनों हत्याएं शामिल हैं। पुलिस ने आत्मसमर्पण के समय उसके पास से दो INSAS राइफल, एक AK-47, एक AK-56, 505 कारतूस और दस मैगजीन सहित भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद किया।

मुंगेर जिले के पुलिस अधीक्षक सैयद इमरान मसूद के नेतृत्व में जिले में चलाए जा रहे लगातार नक्सल विरोधी अभियानों ने नक्सली संगठन को कमजोर कर दिया है। पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में लगातार हो रही छापेमारी, खुफिया नेटवर्क की सक्रियता और स्थानीय लोगों का सहयोग नक्सलियों को आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित कर रहा है। दिसंबर 2025 में तीन इनामी नक्सली कमांडरों—बाबूलाल कोड़ा, नारायण कोड़ा और विनोद कोड़ा—ने हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण किया था। जुलाई 2025 में भी एक सक्रिय नक्सली दस्ते के सदस्य ने हथियार छोड़ दिए थे। इन घटनाओं से नक्सली संगठन की जड़ें कमजोर हुई हैं और सुरक्षा बलों की रणनीति की सफलता स्पष्ट हुई।
सुरेश कोड़ा का आत्मसमर्पण न केवल मुंगेर जिले के लिए बल्कि पूरे बिहार में नक्सल विरोधी अभियानों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार जिले में लगातार नक्सल विरोधी कार्रवाई से नक्सली नेटवर्क लगभग समाप्ति की ओर है। आत्मसमर्पण के समय बरामद हथियार और गोला-बारूद जिले की सुरक्षा बलों के लिए विशेष महत्व रखते हैं और उन्हें इलाके की सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिलेगी।
स्थानीय नागरिकों ने सुरेश कोड़ा के आत्मसमर्पण का स्वागत करते हुए कहा कि जिले में पहले से बेहतर सुरक्षा और शांति महसूस की जा रही है। SP सैयद इमरान मसूद की रणनीति और लगातार उपलब्धियां जिले में नक्सली गतिविधियों को समाप्त करने, आम लोगों के लिए सुरक्षित वातावरण बनाने और क्षेत्र के विकास की दिशा को मजबूत करने में सहायक रही हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार SP सैयद इमरान मसूद की दूरदर्शिता और रणनीति के कारण मुंगेर में लगातार नक्सली आत्मसमर्पण हो रहे हैं। सुरक्षा बलों द्वारा की जा रही नियमित निगरानी, छापेमारी और खुफिया जानकारी का सही इस्तेमाल नक्सली संगठन को लगातार कमजोर कर रहा है। इससे जिले में निवेश के लिए सकारात्मक माहौल बन रहा है, सामाजिक गतिविधियों और शिक्षा के क्षेत्र में विकास के नए अवसर सामने आए हैं।
सुरेश कोड़ा के आत्मसमर्पण के बाद जिले में नक्सली गतिविधियों के बड़े पैमाने पर समाप्त होने का संकेत मिला है। अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली अब समाज में पुनर्वास योजना के तहत शामिल होंगे। यह योजना न केवल उनके पुनर्वास में मदद करेगी बल्कि जिले में कानून और व्यवस्था बनाए रखने में भी सहायक होगी।
मुंगेर जिले की पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में लंबे समय से चल रहे नक्सली विरोधी अभियान ने नक्सलियों की घेराबंदी की। लगातार अभियान, सुरक्षा बलों की सक्रियता और स्थानीय लोगों की सहयोग भावना ने नक्सली संगठन को कमजोर कर दिया। सुरक्षा बलों के अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के आत्मसमर्पण लगातार जारी रहने से मुंगेर पूरी तरह नक्सल मुक्त जिले के रूप में उभर रहा है।
SP सैयद इमरान मसूद की रणनीति में न केवल नक्सली गतिविधियों पर अंकुश लगाना शामिल है बल्कि स्थानीय जनता के बीच सुरक्षा का भरोसा भी कायम करना शामिल है। उन्होंने जिले में सुरक्षा उपायों को आधुनिक तकनीक और खुफिया जानकारी के साथ जोड़ा है। इस रणनीति के तहत नक्सली प्रभावित इलाकों में नियमित पैट्रोलिंग, छापेमारी और सक्रिय निगरानी सुनिश्चित की गई।
सुरेश कोड़ा के आत्मसमर्पण से मुंगेर में सुरक्षा बलों की ताकत और रणनीतिक क्षमता का भी पता चलता है। इससे जिले में निवेश, व्यापार, शिक्षा और सामाजिक गतिविधियों में बढ़ोतरी की उम्मीद जगी है। अधिकारी मानते हैं कि जिले में लगातार आत्मसमर्पण और हथियारों की बरामदगी से नक्सल विरोधी रणनीति की सफलता स्पष्ट हो रही है।
स्थानीय लोगों के अनुसार SP सैयद इमरान मसूद की दूरदर्शिता और लगातार उपलब्धियों ने जिले में नक्सली खतरे को समाप्त कर दिया है और आम जनता के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया है। प्रशासन की सक्रियता और सुरक्षा व्यवस्था ने मुंगेर को नक्सली गतिविधियों के लिए असुरक्षित क्षेत्र बना दिया।
मुंगेर जिले में सुरेश कोड़ा के आत्मसमर्पण ने जिले में सुरक्षा, शांति और विकास की नई राह खोल दी है। अधिकारियों का कहना है कि जिले में चल रही अभियान रणनीति अन्य नक्सल प्रभावित जिलों के लिए भी मॉडल साबित हो सकती है। इस सफलता ने न केवल सुरक्षा बलों के मनोबल को बढ़ाया है बल्कि जिले में विकास की दिशा में स्थायी बदलाव की नींव रखी है।

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